Gurugram: अरावली में मिला 8 लाख साल पुराना मानव इतिहास,रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

इन दुर्लभ पुरातात्विक अवशेषों को और अधिक विनाश से बचाने के लिए उनका संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा, दमदमा क्षेत्र में ऐसी दुर्लभ पुरातात्विक विरासत को भविष्य में पर्यटन के लिए बढ़ावा दिया जा सकता है। अरावली का यह क्षेत्र, जो पहले से ही अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, अब अपने समृद्ध मानव इतिहास के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

Gurugram News Network – अरावली पर्वतमाला, जो सदियों से अपने पर्यावरणीय संतुलन और समृद्ध जैव विविधता के लिए जानी जाती है, अब मानव इतिहास के एक नए और रोमांचक अध्याय को भी उजागर कर रही है। हाल ही में ग्रीनवॉल प्रोजेक्ट के तहत किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण ने इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला में प्रागैतिहासिक काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक निरंतर मानव गतिविधियों के चौंकाने वाले पुरातात्विक साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।

ग्रीनवॉल प्रोजेक्ट से पहले, अरावली के 420 एकड़ क्षेत्र में पुरातत्व विरासत अनुसंधान और प्रशिक्षण अकादमी द्वारा गहन सर्वेक्षण किया गया था। इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष न केवल अरावली के महत्व को बढ़ाते हैं, बल्कि भारत के मानव इतिहास को समझने के लिए नई राहें भी खोलते हैं।

दमदमा क्षेत्र में मिले पुरापाषाण कालीन अवशेष

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनवॉल प्रोजेक्ट के तहत दमदमा-खेड़ला क्षेत्र में अरावली की 420 एकड़ भूमि पर हुए अध्ययन के दौरान कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजें की गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख दमदमा क्षेत्र से मिली पुरापाषाण कालीन कलाकृतियां हैं। इन कलाकृतियों में हाथ की कुल्हाड़ी (हैंड एक्स), क्लीवर और खुरचने वाले औजार (स्क्रैपर) शामिल हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये औजार लगभग छह से आठ लाख साल पुराने हो सकते हैं, जो इस बात का संकेत है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता का विकास काफी पहले से हो रहा था। ये कलाकृतियां अधिकतर क्वार्ज़िटिक बलुआ पत्थर पर तैयार की गई हैं, जो उस समय के मानव की पत्थर के औजार बनाने की तकनीक और कौशल को दर्शाती हैं। इन औजारों की खोज से यह स्पष्ट होता है कि उस सुदूर अतीत में अरावली का यह हिस्सा आदिमानव के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान रहा होगा, जहां वे शिकार, भोजन संग्रह और अन्य दैनिक गतिविधियों के लिए इन औजारों का उपयोग करते थे।

रॉक आर्ट के अनूठे प्रमाण

पुरापाषाण कालीन औजारों के अलावा, सर्वेक्षण में रॉक आर्ट के भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। इनमें कप्यूल (कप मार्क) और अन्य उत्कीर्णन शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन कप्यूल का अर्थ आज तक समझा नहीं जा सका है। हालांकि, इन कप्यूल का होना अरावली पर्वतमाला की एक खास विशेषता है। इस क्षेत्र में विस्तृत और व्यवस्थित जांच भविष्य में इनमें से कुछ प्रतीकों के अर्थ को समझने में मदद कर सकती है।

रॉक आर्ट मानव की रचनात्मकता और उसके सांस्कृतिक विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है। ये उत्कीर्णन उस समय के मानव के विचारों, विश्वासों और जीवन शैली की झलक प्रदान करते हैं। यह दर्शाता है कि अरावली सिर्फ रहने की जगह नहीं थी, बल्कि यह मानव की कलात्मक और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति का भी केंद्र रही होगी।

संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने का सुझाव

विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान सर्वेक्षण से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि दमदमा क्षेत्र के आसपास की अरावली पर्वतमाला निस्संदेह प्रागैतिहासिक काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक मानव गतिविधि का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रही है। यह क्षेत्र देश के इस हिस्से में पाषाण युग की संस्कृतियों के सबसे शुरुआती सांस्कृतिक अवशेषों से लेकर आज तक के मानव सांस्कृतिक परिवर्तन को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इसलिए, इन दुर्लभ पुरातात्विक अवशेषों को और अधिक विनाश से बचाने के लिए उनका संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा, दमदमा क्षेत्र में ऐसी दुर्लभ पुरातात्विक विरासत को भविष्य में पर्यटन के लिए बढ़ावा दिया जा सकता है। अरावली का यह क्षेत्र, जो पहले से ही अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, अब अपने समृद्ध मानव इतिहास के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा और लोगों को अपनी विरासत के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।

अरावली का प्राचीन इतिहास: एक भूवैज्ञानिक चमत्कार

अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसका भूवैज्ञानिक इतिहास लगभग 2 से 3 अरब वर्ष पुराना है। इसका निर्माण भारतीय उपमहाद्वीपीय प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने के कारण हुआ था। यह उस समय की बात है जब हिमालय का कोई अस्तित्व नहीं था। अपने निर्माण के समय, अरावली की ऊंचाई हिमालय से भी अधिक मानी जाती है, लेकिन करोड़ों वर्षों के क्षरण और कटाव ने इसे एक अवशिष्ट पर्वत श्रृंखला में बदल दिया है।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker!